लता मौसी चलने लगीं तो मुकेश और रचना भावुक हो गए। मौसी दोनों को आशीर्वाद देकर अपने घर लौट गईं।
हफ्ते भर पहले जब वह आईं थीं तो पति पत्नी किसी को भी उनका आना अच्छा नहीं लगा था। दोनों के रिश्ता उस समय बहुत तल्ख था। आपस में बाततीत बंद थी। लेकिन मौसी के सामने सामान्य रहना पड़ता था।
अनुभवी मौसी भी सब भांप गईं। जानबूझ कर दोनों को एक दूसरे के सामने कर देती थीं। एक दिन दोनों को यह कह कर कमरे में बिठा दिया कि जो मन में दबा रखा है एक दूसरे से कह दो। करीब दो घंटे तक दोनों एक दूसरे से अपनी अपनी शिकायत करते रहे। अगले दिन से दोनों सचमुच सामान्य हो गए।
अपनी ज़िंदगी में दोनों इस कदर खो गए थे कि आपस में लड़ने का भी समय नहीं रह गया था। यह दोनों के मन में दूरी पैदा कर रहा था। मौसी ने अचानक आकर दूरी कम कर दी थी।
हफ्ते भर पहले जब वह आईं थीं तो पति पत्नी किसी को भी उनका आना अच्छा नहीं लगा था। दोनों के रिश्ता उस समय बहुत तल्ख था। आपस में बाततीत बंद थी। लेकिन मौसी के सामने सामान्य रहना पड़ता था।
अनुभवी मौसी भी सब भांप गईं। जानबूझ कर दोनों को एक दूसरे के सामने कर देती थीं। एक दिन दोनों को यह कह कर कमरे में बिठा दिया कि जो मन में दबा रखा है एक दूसरे से कह दो। करीब दो घंटे तक दोनों एक दूसरे से अपनी अपनी शिकायत करते रहे। अगले दिन से दोनों सचमुच सामान्य हो गए।
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