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रक्षा सूत्र

सरहद पर स्थित आर्मी पोस्ट में सभी फौजियों में कौतुहल था। एक पत्र सभी के आकर्षण का केंद्र बना था। यह पत्र किसी ख़ास फौजी के लिए नहीं वरन सरहद पर तैनात सभी फौजी भाइयों के लिए था। एक फौजी ने पत्र खोला और सभी सुनने के लिये घेरा बनाकर बैठ गए।
फौजी ने पत्र पढ़ना आरम्भ किया

फौजी भाइयों
प्रणाम,

इस विशाल परिवार हिन्दुस्तान, जिसकी सीमाओं की हिफाज़त में आप सभी कठिन परिस्तिथियों में भी तैनात हैं,  मैं उसकी एक छोटी सी सदस्य हूँ।  राखी का पर्व आने वाला है। अतः आपकी छोटी बहन आपके लिए ये रक्षा सूत्र भेज रही है। मैं नहीं जानती कि जब आधुनिक हथियारों से लैस उपद्रवी घात लगा कर हमला करेंगे तो  यह आपकी हिफाज़त कर सकेगा या नहीं। परन्तु यह डोर है उस प्रेम, आस्था और विश्वास की जिससे हम सब बंधे हैं। यह एक एहसास है इस बात का कि अपने घरों में बैठे बहुत से लोग आपके बारे में फ़िक्रमंद हैं। आप सब जो कठिनाईयां उठा कर हमारी रक्षा में लगे हैं, उसके लिए कई मस्तक श्रद्धा से नत होते हैं। जब आप में से किसी को क्षति पहुँचती है तो कई आँखें नम हो जाती हैं। यह धागा उसी श्रद्धा एवं प्रेम का प्रतीक है। यह कुछ और करे न करे उन कठिन परिस्तिथियों में आप लोगों को बल अवश्य प्रदान करेगा।  
                     
                                                   आपकी
                                                  बहन 


लिफाफे के भीतर एक रेशमी धागा था। एक सन्नाटा सा छाया था। सभी अपने में मग्न थे। अपने भीतर एक नई उर्जा को महसूस कर रहे थे। 

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ना मे हाँ

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