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जन्मदिन का तोहफा


नकुल ने अपना गुल्लक खोला और अपनी जमा पूंजी को गिना. अभी भी बहुत पैसे इकठ्ठे करने हैं. पिछले तीन महिनों से वह पैसे बचा रहा था. आइसक्रीम चॉकलेट्स की अपनी इच्छा को दबाकर सारी पॉकेटमनी जमा कर देता था. इस बीच पड़े अपने जन्मदिन पर कपड़ों के लिए मिले पैसे भी उसने खर्च नही किए.
घर में सभी जानते थे कि वह पैसे बचा रहा है पर क्यों यह एक रहस्य था. वह किसी को कुछ नही बताता था. घर वाले यह सोंच कर खुश थे कि इसी बहाने बचत की आदत पड़ रही है.
नकुल पढ़ने लिखने में बहुत होशियार था. सदैव अच्छे अंक लाता था. उसे यदि कोई टक्कर दे पाता था तो वह था उसका बेस्ट फ्रेंड संजीव. संजीव भी एक मेधावी छात्र था. नकुल और उसके बीच एक स्वस्थ प्रतियोगिता चलती थी कि देखें इस बार कौन कक्षा में प्रथम आता है. दोनों में आपस में बहुत प्रेम था.
हलांकि दोनों के परिवारों की आर्थिक स्थिति में बहुत फ़र्क था. नकुल के माता पिता दोनों बहुत अच्छा कमाते थे. उसके घर में किसी चीज़ की कमी नही थी. जबकी संजीव के पिता एक छोटी सी दुकान चलाते थे. घर में प्रायः पैसों का आभाव रहता था. संजीव पढ़ने में अच्छा था इसीलिए उसकी फीस माफ थी तथा उसे छात्रवृत्ति भी मिलती थी. इसी कारण उसकी पढ़ाई चल पा रही थी.
नकुल सोंच रहा था कि अभी भी करीब डेढ़ हजार रुपये कम हैं उनकी व्यवस्था कैेसे करूँ. बहुत सोंचने पर भी कुछ सूझ नही रहा था. समय भी अधिक नही बचा था.
अगले दिन जब वह स्कूल गया तो पता चला कि स्कूल में फेट होने वाली है. इसमें छात्र अपनी स्टॉल लगा सकते हैं. स्कूल को निश्चत राशि देने के बाद जो लाभ होगा वह उस छात्र का होगा. नकुल को बची हुई राशि एकत्र करने का रास्ता सूझ गया.
नकुल एक अच्छा चित्रकार था. उसने कई पुरस्कार भी जीते थे. उसके पास वॉटरकलर से बनाए कई चित्र थे. आने वाले क्रिसमस वा नए साल के लिए उसने कुछ कार्ड्स तथा चित्र और बना लिए. फेट में उसकी स्टॉल सबके आकर्षण का केंद्र रही. उसे अच्छा मुनाफा हुआ.
स्कुल टूर के लिए पैसे जमा करने के लिए अब दो ही दिन बचे थे. लगभग सभी लोग पैसा जमा करा चुके थे. संजीव के पिता के पास इतने पैसे नही थे अतः वह टूर पर नही जा रहा था.
नकुल संजीव के पिता को साथ लेकर क्लास टीचर से मिला और टूर के लिए पैसे जमा करा दिए.
नकुल जानता था कि संजीव भी टूर पर जाना चाहता था लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के कारण कुछ कह नही पा रहा था. नकुल भी अपने मित्र के बिना नही जाना चाहता था. अतः अब तक उसने भी पैसे जमा नही किए थे. वह स्वयं अपने मित्र की सहायता करना चाहता था. अतः पैसे बचा रहा था. पर्याप्त धन जमा हो जाने पर वह संजीव के पिता से मिला और उन्हें इस बात के लिए मना लिया कि वह संजीव के टूर के पैसे स्वयं देगा. अपने मम्मी पापा को जब उसने यह बात बताई तो उन्होंने भी उसका समर्थन किया. नकुल ने संजीव के पिता से कहा कि वह यह बात अभी उससे ना बताएं. सभी को 10 जनवरी को टूर पर निकलना था. उस दिन संजीव की सालगिरह थी. अतः अचानक उसे यह बात बता कर खुश कर देंगे.
नकुल टूर पर जाने की तैयारी करने लगा. संजीव के माता पिता भी चुपचाप उसके जाने की तैयारी करने लगे.
10 तारीख को नकुल सुबह सुबह संजीव को बर्थडे की मुबारक बाद देने पहुँचा. संजीव ने भी टूर पर जाने के लिए उसे बधाई दी और कहा कि वह उसके लिए टूर की अच्छी अच्छी तस्वीरें खींच कर लाए.
नकुल ने कहा कि ऐसा नही हो सकता क्योंकी उसके बिना वह भी टूर पर नही जाएगा. संजीव ने समझाया कि अब तो यह बिल्कुल भी संभव नही. अतः वह टूर पर जाए और लौटकर अपने अनुभव उसे बताए.
नकुल तथा संजीव के पिता ने उसे सारी बात बता दी. सुनकर संजीव की आंखें भर आईं और उसने नकुल को गले से लगा लिया.

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