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रक्त बीज

मानव एक सीधा साधा व्यक्ति था। एक छोटी सी दुकान चलाता था। इतनी आमदनी हो जाती थी कि वह और उसका परिवार सुख से रह सकें। जीवन में किसी प्रकार की कमी महसूस नहीं होती थी। लेकिन अपने आस पास फैले अन्याय , अत्याचार , भ्रष्टाचार से उसका दिल दुखता था। वह इस सब को मिटाने के लिए कुछ करना चाहता था।
एक बार उसकी दुकान के पास की मिठाई की दुकान पर कुछ बदमाशों ने खूब उत्पात मचाया। दुकान के मालिक को पीटा और रुपये लूट लिए। वो आदमी स्थानीय बाहुबली नेता के थे अतः उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई। मानव से यह बर्दाश्त नहीं हुआ। उसने कुछ दुकानदारों को एकत्रित कर इसका विरोध किया। बात न सुने जाने पर अनशन किया। अंत में वह उस दुकानदार को न्याय दिलाने में सफल हो गया। सारे बाज़ार में उसकी धाक जम गई। वह वहाँ के व्यापारियों का नेता बन गया। धीरे धीरे उसकी ख्याति बढ़ने लगी। इससे प्रेरित होकर उसने पार्षद का चुनाव लड़ा और जीत गया। इस तरह वह राजनीति के गलियारे में पहुँच गया।
उसके पास अधिकार आ गया। अब वह लोगों की भलाई के काम कर सकता था। लेकिन इसी के साथ कई प्रलोभन भी आये। जिनसे वह बच नहीं सका। उसने सोंचा यदि लोगों के साथ साथ उसका भी फायदा हो तो बुरा क्या है। उसका लालच बढ़ने लगा। अब वह राजनीति में और आगे जाना चाहता था। किंतु अब दूसरों की सेवा करने के लिए नहीं अपनी सत्ता की भूख के लिए। उसने एक राष्ट्रीय स्तर के राजनैतिक दल से संपर्क किया और उसमें शामिल हो गया। अब उसकी दृष्टि विधायक की कुर्सी पर थी।
सबके बारे में सोंचने वाले सीधे साधे मानव, जो कि परिवार की छोटी छोटी खुशियों में खुश था की जगह अब ऐसा मानव था जो सिर्फ अपने हित की सोंचता था। अब वह राजनीति का माहिर खिलाड़ी बन गया था। जो साम दाम दंड भेद सारी नीतियों में निपुण था। जिनके सहारे वह अपने किसी भी प्रतिद्वंदी को मात देता था। इस प्रकार वह आगे बढ़ने लगा। उसका राजनैतिक कद बढ़ने के साथ साथ उसका अहंकार भी बढ़ने लगा।
अहंकार के साथ ही साथ उसकी सत्ता की भूख भी बढ़ने लगी। अब वह राष्ट्रीय स्तर  पर अपनी जगह बनाना चाहता था। लोक सभा का चुनाव जीत कर वह संसद के गलियारों में पहुँच गया।
उसने तेज़ी से तरक्की की थी। सत्ता के साथ साथ दौलत भी आई थी। किंतु अथाह धन अपने साथ कुछ बुराइयां भी लाता है। वह सफलता की सीढ़ियां चढ़ने में इतना व्यस्त था कि अपनी संतान की सही परवरिश पर ध्यान नहीं दे पाया। उसका बेटा गलत राह पर चल पड़ा। ड्रग्स के नशे ने उसे गिरफ्त में ले रखा था। आये दिन किसी न किसी गलत वजह से वह चर्चा में रहता था। मानव ने उसे समझाने का प्रयास किया कि उसकी ये हरकतें मानव के लिए कितनी मुश्किल खड़ी करती हैं। उसके विरोधी तो ऐसी स्तिथियों की ताक में रहते हैं। किंतु उसका बेटा अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आया।
समय बदला विपक्ष में बैठने वाली उसकी पार्टी अप्रत्याशित रूप से जीत कर सत्ता में आ गई। नए मंत्रिमंडल में उसकी भी जगह लगभग निश्चित थी। उन्हीं दिनों एक घटना घट गई। उसके बेटे और उसके कुछ दोस्तों ने नशे की हालत में एक लड़की का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया। सारी घटना मानव के फार्महाउस पर घटी थी। उसके विरोधियों के हाथ एक सुनहरा मौका लग गया। मीडिया तक बात पहुँच गई। मानव ने अपनी पूरी शक्ति झोंक कर इस मामले को दबा तो लिया लेकिन मंत्री पद उसके हाथ से निकल गया। अपनी मंज़िल के इतने करीब पहुँच कर भी वह उसे प्राप्त नहीं कर सका।
छोटी छोटी इच्छाएं दबे पाँव इंसान के मन में कदम रखती हैं। रक्तबीज की भांति एक ख़त्म होती है तो दूसरी को जन्म दे जाती है। धीरे धीरे ये लालच में तब्दील हो जाती हैं। समय के साथ लालच का बीज हवस के वट वृक्ष में बदल जाता है। हवस में इंसान अंधा हो जाता है। अपनी हवस पूर्ति के अलावा कुछ नहीं सोंच पाता है। उसमे बाधा बनने वाला अपना हो या पराया उसका शत्रु होता है। मानव भी अपनी हार को सह नहीं पा रहा था। उसके  अहम् को चोट पहुंची थी। जो क्रोध में बदल गई थी। उसका बेटा उसके रास्ते का सबसे बड़ा कांटा साबित हुआ था।
एक पाँच सितारा होटल के कमरे में मानव की मुलाकात ख्याति प्राप्त शार्प शूटर से हुई।
एक खबर मीडिया में सुर्खी बन गई। सांसद मानव के पुत्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई।


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