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डेयरिंगबाज़

दीपक आज पहली बार अपने दम पर मिशन को अंजाम देने निकला था। 
अपने छोटे से शहर से वह पढ़ाई करने के लिए इस महानगर में आया था। यहाँ वह वैसा ही महसूस करता था जैसे छोटे से तालाब से निकल कर कोई मछली बड़े से समुद्र में आ गई हो। सब कुछ अद्भुत अनोखा। इस समुद्र की कुछ चालाक शर्क मछलियों ने उसे फंसा लिया। वह भी उनकी चमक दमक से खिंचा चला गया। उन्होंने उसे बिंदास जीने के लिए डेयरिंगबाज़ी के गुन सिखाए। आज उसकी परीक्षा थी।
दीपक की नज़र एक महिला पर थी। जैसे ही वह घर से निकली वह मोटरसाइकिल पर उसके पीछे लग गया। जब वह एक गली में घुसी उसने झपट कर उसकी चेन खींची और तेज़ी से मोटरसाइकिल भगा कर गायब हो गया।
दीपक ने अपने कदम तो शिक्षा की राह पर रखे थे किंतु बहक कर अपराध की गली में चला गया।

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