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रूठी गुड़िया

शरद ने देखा कि उसकी नन्हीं बिटिया तन्वी का मूड अभी भी खराब है। उसके लाख मनाने पर भी तन्वी ने उसे माफ नहीं किया था। वैसे गलती शरद की ही थी। वह तो दिन भर के इंतज़ार के बाद घर लौटे पापा की गोद में बैठ कर बात करना चाहती थी। पर शरद कुछ परेशान था। उसने एक आध बार मना भी किया। लेकिन पाँच साल की मासूम अपने उत्साह में उसकी परेशानी समझ नहीं सकी। झुंझला कर शरद ने उसे डांट दिया।
उसके बाद उसे बहुत पछतावा हुआ। उसने रूठी बेटी को मनाने का प्रयास किया। लेकिन वह टस से मस नहीं हुई। शरद को सुबह ही आवश्यक काम से बाहर जाना था। लेकिन बेटी के चेहरे पर मुस्कान देखे बिना जाना नहीं चाहता था।
उसकी पत्नी शरद की मुश्किल समझती थी। उसने तन्वी को गोद में उठा कर प्यार से पूंछा "जब तन्वी गलती करती है तो क्या करती है।"
"मम्मी को सॉरी कहती है।" तन्वी ने भोलेपन से कहा।
"और मम्मी तुमको माफ कर देती है। ऐसे ही कभी कभी मम्मी पापा से भी गलती हो तो है। तुम भी पापा को माफ कर दो।"
तन्वी ने शरद की तरफ देखा। वह कान को हाथ लगा कर सॉरी कह रहा था।
कुछ क्षण अपने पापा को देखने के बाद तन्वी मुस्कुरा दी। शरद ने उसे गोद में उठा कर उसका माथा चूम लिया।

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