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शहीद

कमला ने सारे आवश्यक कागज़ात लिए और निकलने की तैयारी करने लगी। अपने बेटे के अंतिम भुगतान लेने के लिए उसे ही कोशिश करनी थी। उसे याद है जब उसके शहीद बेटे का शव तिरंगे में लिपटा हुआ घर आया था तब सारा शहर उसे अंतिम विदाई देने उमड़ पड़ा था। सरकारी मदद का आश्वासन मिला था। उस गहरे दुख की घड़ी में उसे लगा था जैसे वह अकेली नहीं है।
लेकिन धीरे धीरे सब उसे एक घटना समझ कर भूल गए। अब तो उसे इस सच्चाई का अकेले ही सामना करना है।
उसने घर में ताला लगाया और हिम्मत कर निकल पड़ी।

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ना मे हाँ

सब तरफ चर्चा थी कि गीता पुलिस थाने के सामने धरने पर बैठी थी। उसने अजय के खिलाफ जो शिकायत की थी उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई थी।  पिछले कई महीनों से गीता बहुत परेशान थी। कॉलेज आते जाते अजय उसे तंग करता था। वह उससे प्रेम करने का दावा करता था। गीता उसे समझाती थी कि उसे उसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। वह सिर्फ पढ़ना चाहती है। लेकिन अजय हंस कर कहता कि लड़की की ना में ही उसकी हाँ होती है।  गीता ने बहुत कोशिश की कि बात अजय की समझ में आ जाए कि उसकी ना का मतलब ना ही है। पर अजय नहीं समझा। पुलिस भी कछ नहीं कर रही थी। हार कर गीता यह तख्ती लेकर धरने पर बैठ गई कि 'लड़की की ना का सम्मान करो।'  सभी उसकी तारीफ कर रहे थे।

केंद्र बिंदु

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