सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

अंजान फिज़ा

शायरा ने कपड़े गहने जो समेट सकती थी उनकी गठरियाँ बाँध लीं। उसके दोनों बच्चे सो रहे थे। तेरह बरस की शबनम और दस वर्ष का आमिर। उसने दोनों के माथे प्यार से सहलाए और वहीं बैठ गई। बाहर ज़ोरों की बारिश हो रही थी। उसके भीतर भी एक तूफ़ान मचा था। बस कुछ ही घंटों में यह घर गाँव सब छूट जाएगा। वह एक अंजान जगह को अपना बनाने के लिए चली जाएगी। उसके दिल में एक हूक सी उठी। ' ये कैसी आज़ादी मिली है मुल्क को ? ऐसा बवंडर उठा है जिसने लोगों को उनकी जड़ों से ही उखाड़ दिया। क्या इसी दिन के लिए लड़ी गई थी आज़ादी की जंग ?'
उसके शौहर गाँधी बाबा के पक्के चेले थे। सन ४ २ में अंग्रेजों की लाठी से चोट खाकर ऐसी खटिया पकड़ी कि तीन साल एड़ियां रगड़ने के बाद मौत नसीब हुई। वह सब क्या इसी दिन के लिए था। अपनी धरती छोड़ कर जाना उसके लिए इतना आसान नहीं था। इसी मिटटी में उसके पुरखे दफ़न हैं। यहीं की आबो हवा में वह पली बढ़ी है। अब सब कुछ छोड़ कर जाने में दिल में दिल में टीस उठती है। उसने कई दफा अपने भाईजान को समझाने की कोशिश की " हम क्यों जाएँ यहाँ से। इतनी ज़िन्दगी बितायी है यहाँ। सब अपने ही तो हैं फिर डर किस बात का।"  भाईजान ने समझाया " नादानी मत कर शायरा, जब आग लगी हो तो जंगल का कोई भी हिस्सा महफूज नहीं रहता है।" उनकी दलील सुन कर वह चुप हो गई। चारों तरफ कैसी तो मार काट मची है। मानवता को सरेआम नंगा कर दिया है। अभी तो अपने लोग पास हैं। कल जब ये सब चले जायेंगे तो वह किसके सहारे रहेगी। जवान होती अपनी बच्ची की सोंच कर उसने भारी मन से सामान बाँध लिया।
बारिश ख़त्म हो गई थी। आसमान साफ़ था। भाईजान बैलगाड़ी लेकर आ गए थे। उसने बच्चों को जगाया और एक लम्बे सफ़र के लिए तैयार होने लगी। घर छोड़ने से पहले उसने तोते का पिंजरा खोल कर उसे उड़ा दिया। उसे क्यों ले जाए ऐसी जगह जहां की हवा से वह अंजान है। 
http://www.tumbhi.com/writing/short-stories/anjaan-fiza/ashish-trivedi/44616#.U8dXSP3EVZo.facebook

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गिरगिट

    गिरगिट नव्या की ज़िंदगी में कुछ सही नहीं चल रहा था। सरकारी नौकरी के लिए कई परीक्षाएं दीं। कुछ में असफल रही। कुछ के परिणाम अभी तक नहीं आए थे। इसी बीच उसकी शादी की बात चली। सांवले रंग की भरपाई के लिए गाड़ी की मांग हुई। वह उसके पिता की क्षमताओं के बाहर था। बात खत्म हो गई। इस समय वह बहुत परेशान थी। सोच रही थी कि कोई प्राइवेट नौकरी कर ले। वह अखबार में नौकरी के इश्तिहार देखने लगी। कुछ को मार्क किया। एक जगह फोन मिलाने जा रही थी कि उसकी सहेली का फोन आया। फोन उठाते ही उसने मुबारकबाद दी। नव्या हैरान थी कि मुबारकबाद किस बात की। सहेली ने बताया कि रुके हुए परिणामों में से एक परीक्षा का नतीजा आ गया है। वह उस परीक्षा में उत्तीर्ण हो गई है। नव्या बहुत खुश हुई। उसने खुद भी इंटरनेट पर परिणाम देखा। वह इंटरव्यू की तैयारी करने लगी। इस बार उसने कोई कसर नहीं छोड़ी। इंटरव्यू में भी पास हो गई। उसकी सरकारी नौकरी लग गई। नौकरी लगने के एक महीने बाद ही जिन लोगों ने रिश्ता तोड़ा था वह पुनः उसके घर आए। लड़के की माँ ने कहा, "मेरा बेटा बहुत नाराज़ हुआ। उसने कहा कि गुण देखे जाने चाहिए। रूप रंग नहीं। लड़की न...

केंद्र बिंदु

पारस देख रहा था कि आरव का मन खाने से अधिक अपने फोन पर था। वह बार बार मैसेज चेक कर रहा था। सिर्फ दो रोटी खाकर वह प्लेट किचन में रखने के लिए उठा तो पारस ने टोंक दिया। "खाना तो ढंग से खाओ। जल्दी किस बात की है तुम्हें।" "बस पापा मेरा पेट भर गया।" कहते हुए वह प्लेट किचन में रख अपने कमरे में चला गया। पारस का मन भी खाने से उचट गया। उसने प्लेट की रोटी खत्म की और प्लेट किचन में रख आया। बचा हुआ खाना फ्रिज में रख कर वह भी अपने कमरे में चला गया। लैपटॉप खोल कर वह ऑफिस का काम करने लगा। पर काम में उसका मन नही लग रहा था। वह आरव के विषय में सोच रहा था। उसने महसूस किया था कि पिछले कुछ महीनों में आरव के बर्ताव में बहुत परिवर्तन आ गया है। पहले डिनर का समय खाने के साथ साथ आपसी बातचीत का भी होता था। आरव उसे स्कूल में क्या हुआ इसका पूरा ब्यौरा देता था। किंतु जबसे उसने कॉलेज जाना शुरू किया है तब से बहुत कम बात करता है। इधर कुछ दिनों से तो उसका ध्यान ही जैसे घर में नही रहता था। पारस सोचने लगा। उम्र का तकाज़ा है। उन्नीस साल का हो गया है अब वह। नए दोस्त नया माहौल इस सब में उसने अपनी अलग दुनि...

सामंजस्य

  सामंजस्य निर्मला ऑनलाइन हिंदी की क्लास में सामंजस्य शब्द का अर्थ समझा रही थी। "बच्चों सामंजस्य का मतलब होता है तालमेल बिठाना। मतलब अपने आसपास के वातावरण व लोगों के साथ इस प्रकार संबंध बनाना कि हम और हमारे आसपास सभी शांति से रह सकें।" एक बच्चे ने पूछा, "मैम पाठ में कहा गया है कि पर्यावरण से सामंजस्य बनाए रखना चाहिए। इसका क्या मतलब है ?" निर्मला ने समझाया, "बेटा इसका मतलब है कि हमारे आसपास पेड़ पौधे और अनेक प्रकार के जीव जंतु हैं। हम सभी प्राणियों में सबसे श्रेष्ठ हैं। इसलिए हमारा कर्तव्य है कि हम पर्यावरण की रक्षा करें जिससे बाकी के प्राणी भी धरती पर रह सकें।" अभी उसने अपना जवाब खत्म ही किया था कि उसके कानों में अपनी बेटी के चिल्लाने की आवाज़ सुनाई पड़ी। वह उठकर बेटी के पास भागी। उसने देखा कि उसके कमरे में एक बंदर घुस गया है। उससे डर कर उसकी बेटी कोने में दुबकी चिल्ला रही थी। निर्मला भाग कर बाथरूम से वाइपर ले आई। उसने बंदर को भगा दिया। दरवाज़ा बंद करके वह क्लास लेने के लिए वापस आ गई। बच्चों ने पूछा कि क्या हो गया था तो उसने कहा कि बंदरों ने उत्पात मचा रखा...