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सिस्टम

ट्रेन एक घंटा लेट स्टेशन पहुँची। अब अधिक समय नही था। विनय ने प्लेटफार्म पर लगे नल पर मुंह धोया और स्टेशन के बाहर आकर रिक्शा पकड़ लिया। रात भर ट्रेन में ठुस ठुसा कर जैसे तैसे सफर किया था। पर एक कप चाय पीने का भी वक्त नही था। 
भागते दौड़ते परीक्षा केंद्र पहुँचा तो पता चला कि पर्चा लीक हो जाने के कारण परीक्षा निरस्त हो गई। ना जाने कितने परीक्षार्थी दूर दूर से आए थे। सब परेशान थे। वह भी निराश था। पिछले कई महीनों से परीक्षा की तैयारी के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहा था। सोंचता था कि परीक्षा पास कर यदि सरकारी नौकरी लग गई तो घर की गरीबी दूर हो जाएगी। 
दूसरी गाड़ी आने में अभी चार घंटे थे। कहीं जाने का ठिकाना नही था। वह बेमकसद सड़क पर चलने लगा। मन खिन्न था। पर्चा लीक होने में उसकी या उसके जैसे अन्य लोगों की क्या गलती थी। उन्हें क्यों परेशान किया गया। अब उसे क्रोध आने लगा था। तभी सड़क पर एक जुलूस निकला। हाथों में तख्तियां पकड़े कुछ लोग सिस्टम की नाकामी के विरुद्ध नारे लगा रहे थे। उसकी भी मुठ्ठियां भिंच गईं। वह भी जुलूस में शामिल हो गया।
कुछ ही दूर पर पुलिस ने जूलूस को आगे बढ़ने से रोका। लोगों के जबरदस्ती करने पर पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया।
विनय को भी लाठी की चोट लगी। पुलिस वैन में बैठा कर उसे औरों के साथ थाने ले जाया गया।

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