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सुहानी रात

फिल्म देख कर लौटती हुई अनन्या बहुत खुश थी। टहलते हुए वह बस स्टैंड की तरफ जा रही थी। 
इस रोमांटिक मौसम में उसे राकेश की याद आने लगी। उसने फोन निकाल कर मैसेज किया 'लव यू, मिस यू।'
अचानक एक मोटरसाइकिल तेज़ी से उसके बगल से निकल गई। गुस्से में उस तरफ देख कर वह चिल्लाई "दिखता नही है।"
फोन बैग में रख वह बस स्टैंड की ओर बढ़ने लगी। तभी वह  मोटरसाइकिल उसकी बगल में आकर रुक गई। पीछे बैठे लड़के ने  अपना हाथ उसके कंधे पर रख उसे अपनी तरफ खींचा। उसके हाथ अनन्या को इधर उधर छूने लगे। वह खुद को छुड़ाने का प्रयास कर रही थी। दोनों लड़के उसकी हालत पर हंस रहे थे। कुछ देर उसे परेशान करने के बाद दोनों अपनी जीत के नशे में चिल्लाते हुए भाग गए।
दर्शकजन भी अपने रास्ते चल दिए।

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केंद्र बिंदु

पारस देख रहा था कि आरव का मन खाने से अधिक अपने फोन पर था। वह बार बार मैसेज चेक कर रहा था। सिर्फ दो रोटी खाकर वह प्लेट किचन में रखने के लिए उठा तो पारस ने टोंक दिया। "खाना तो ढंग से खाओ। जल्दी किस बात की है तुम्हें।" "बस पापा मेरा पेट भर गया।" कहते हुए वह प्लेट किचन में रख अपने कमरे में चला गया। पारस का मन भी खाने से उचट गया। उसने प्लेट की रोटी खत्म की और प्लेट किचन में रख आया। बचा हुआ खाना फ्रिज में रख कर वह भी अपने कमरे में चला गया। लैपटॉप खोल कर वह ऑफिस का काम करने लगा। पर काम में उसका मन नही लग रहा था। वह आरव के विषय में सोच रहा था। उसने महसूस किया था कि पिछले कुछ महीनों में आरव के बर्ताव में बहुत परिवर्तन आ गया है। पहले डिनर का समय खाने के साथ साथ आपसी बातचीत का भी होता था। आरव उसे स्कूल में क्या हुआ इसका पूरा ब्यौरा देता था। किंतु जबसे उसने कॉलेज जाना शुरू किया है तब से बहुत कम बात करता है। इधर कुछ दिनों से तो उसका ध्यान ही जैसे घर में नही रहता था। पारस सोचने लगा। उम्र का तकाज़ा है। उन्नीस साल का हो गया है अब वह। नए दोस्त नया माहौल इस सब में उसने अपनी अलग दुनि...

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