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ईनाम

मंत्री महोदया के कमरे में बहुत देर से कोई मीटिंग चल रही थी। बाहर उनका पीए पलाश परेशान टहल रहा था। डॉक्टर के हिसाब से मैडम के लिए समय पर दवा लेना ज़रूरी है। पता नही मीटिंग कब तक चले। इतने दिनों से साथ काम करने के कारण मैडम के प्रति एक लगाव सा हो गया था। इसलिए उनकी हर बात का वह ध्यान रखता था। जब नही रहा गया तो दरवाज़ा खटखटा कर अंदर चला गया।
"माफ कीजिएगा। लेकिन आपके दवा लेने का समय हो गया था।"
दवा और पानी रख कर वह वापस आ गया।
"विपक्ष को एक अच्छा मौका हाथ लग गया है। आसानी से नही छोड़ेंगे।" उनके मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने कहा।
जब से पलाश दवा दे कर गया था मंत्री महोदया कुछ सोच रही थीं। एक निर्णय कर उन्होंने कहा "मैं सब संभाल लूंगी। आप जाएं।"
अधिकारी के जाने के बाद उन्होंने पलाश को बुलाया। उसके घर परिवार के बारे में पूंछने लगीं।
"तुम्हारी माँ का ऑपरेशन होना था ना।"
"जी वह पैसे के इंतज़ाम में देर हो रही है।"
"देर मत करो। जाकर उन्हें यहाँ ले आओ। मैं इंतज़ाम करवा देती हूँ।"
पलाश अपनी माँ को लेने गांव चला गया। 
अगले दिन सभी न्यूज़ चैनल पर ब्रेकिंग न्यूज़ थी। स्वास्थ मंत्री के पीए को एक घोटाले के मामले में उसके गांव से गिरफ्तार कर लिया गया। 
मंत्री महोदया ने बयान दिया "भले ही वह मेरा बेटा क्यों ना होता उसे बख़्शा नही जाता। जांच निष्पक्ष होगी।"

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