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अतीत की परछांई

रोहन अपने बेड पर लेटा हुआ था। शरीर थका था लेकिन मन की उमंग अभी कम नहीं हुई थी। शराब से ज्यादा अपनी शोहरत का नशा था। पाँच साल मेहनत के बाद पहला बेस्ट ऐक्टर अवार्ड मिला था। 
खुशी की खुमारी में अचानक अतीत की काली बदली आकर छा गई। उसमें से एक चेहरा झांकने लगा। 
रोहन अतीत मे चला गया। फिल्मों में प्रोडक्शन मैनेजर का काम करते हुए उसमें ऐक्टर बनने की इच्छा जागी। उसने इस संबंध में कई निर्देशकों से बात की किंतु सबने देखते हैं कह कर टाल दिया।
एक फिल्म के सेट पर काम करते हुए एक स्पॉट ब्वाय की दुर्घटना में मृत्यु हो गई। प्रोड्यूसर ने मामले को दबाना चाहा। रोहन ही प्रोडक्शन का काम देख रहा था। उसने विरोध किया। फिल्म के निर्देशक ने बीच बचाव कर रास्ता निकाला कि यदि रोहन मामले को तूल ना दे तो उसे अगली फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका मिल सकती है। 
अपना सपना पूरा होने का लालच उस पर हावी हो गया। उसने कदम पीछे खींच लिए।
आज वह सफलता की चोटी पर था। लेकिन अतीत से झांकता चेहरा उसे याद दिला रहा था कि सफलता की जिस सीढ़ी पर वह चढ़ कर आया है उसके पहले पायदान पर उसका खून लगा है।

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