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मुक्ति

कमल समझ गया था कि डॉक्टर जांच करने के बाद क्या कहने वाले हैं। अब तक सीने में दबा दर्द एक गुबार की तरह उठा और उसके गले में आकर अटक गया। आँखों से आंसू ढलकने लगे।
तीन महीनों से उसका बेटा जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहा था। हंसता खेलता बच्चा मशीन के ज़रिए सांस ले रहा था। उसकी चंचलता का बिस्तर पर निढाल पड़े रहना एक पिता के लिए बहुत कष्टदाई था।
डॉक्टर ने आकर बताया कि उसका बेटा अब नहीं रहा। दुख के बीच बेटे के कष्ट मुक्त हो जाने का एहसास उसे सहला रहा था।

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