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माँ

 

बहुत देर तक फैशन टीवी पर नपे तुले कदमों से चलती सांचे में ढले हुए अंगो वाली माडलों को देखता रहा. दिमाग में वासना का एक सागर हिलोरें मार रहा था. सोंचा चलो कुछ देर चहल कदमी कर लूं . घर  से निकल कर बाजार की तरफ चल दिया. चलते हुए सड़क के किनारे बैठी 18 ,19 साल की एक भिखारिन  पर नज़र पड़ी. तंग फटे हुए कपड़ों से सारा शारीर झांक रहा था. मन में फिर वही तरंगें जोर मारने लगीं. नज़र उसकी खुली हुई छाती पर पड़ी. एक बच्चा छाती से चिपका हुआ बड़े इत्मिनान से दूध पी रहा था. वो लड़की भी सारी  दुनिया से बेखबर पूर्ण संतोष से उस बच्चे का मुख देख रही थी. अचानक सारी वासना आंख के रस्ते पानी बनकर  बह गयी. बेसाख्ता मुह से निकल पड़ा  "माँ"

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