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मेरी राह

जेम्स ने अपने पिता की स्टडी में प्रवेश किया। वो कोई किताब पढ़ रहे थे। जेम्स ने धीरे से कहा " डैड मुझे आप से कुछ बात करनी है।" उसके पिता ने नज़रें उठाए बिना  कहा " बोलो क्या बात है।"  " डैड  मैं  एन . डी . ऐ . के एग्जाम में नहीं बैठना चाहता।" जेम्स ने सहमते हुए जवाब दिया। उसके पिता ने किताब बंद कर दी। उसे गौर से देख कर कहा " क्यों इस बार तैयारी नहीं हो पायी।"  जेम्स ने हिम्मत जुटा कर कहा " जी नहीं दरअसल मैं एन . डी . ऐ . में नहीं जाना चाहता हूँ। डैड, म्यूजिक मेरा पैशन है। मैं म्यूजिक के फील्ड में जाना चाहता हूँ।"

उसके पिता ने तंज़  किया " तो अब एक एक्स आर्मीमैन का बेटा पार्टियों में गाना गायेगा।" जेम्स को अपने पिता का तंज़ चुभ गया " डैड म्यूजिक फील्ड में भी बहुत सारी करीअर ऑपरच्यूनिटीज़ हैं।" जेम्स के पिता ने अपना फैसला सूनाते हुए कहा " मुझे कोई बहस नहीं करनी है। मुझे मेरे घर में कोई गाने वाला नहीं चाहिए।" यह कह कर वह फिर से पढ़ने लगे। जेम्स बिना कुछ बोले कमरे से बाहर आ गया।

वह बहुत दुखी था। उसने अपना गिटार लिया और सईकिल पर सवार हो अपने पसंदीदा स्पॉट की तरफ चल दिया। इस जगह पर कोई आता जाता नहीं था। इस जगह की शांति में अक्सर वह अपने गिटार पर अपनी मनपसंद धुनें बजता था।


वहां पहुँच कर उसने गिटार के साथ अपना दिल बहलाना चाहा। किन्तु लगता था जैसे की गिटार के तार भी उसकी भांति बेचैन थे। उस ने गिटार रख दिया। वह कोई निर्णय नहीं कर पा रहा था। वह अपने पिता का दिल नहीं दुखाना  चाहता था। उसकी  माँ के जाने के बाद उन्होंने ने ही उसे पाला था। उसने बहुत कोशिश की थी   एन . डी . ऐ .के लिए अपना मन बनाने की। पर वह जानता था की यदि वह जबदस्ती मन को मार कर आर्मी में जायेगा भी तो सफल नहीं हो पाएगा। उसने बहुत सोच कर ही अपना फैसला पिता को सुनाया था।


जेम्स एक दोराहे पर खड़ा था। क्या करे कुछ समझ नहीं पा रहा था। उसकी आँखों में उसके मित्र राहुल का चेहरा घूम गया। राहुल भी ऐसे ही दोराहे पर था फुटबाल या पढाई। माँ  बाप के फैसले के आगे झुक तो गया लेकिन निभा नहीं पाया। ज़हर खा कर उसने स्वयं को इस दुविधा से मुक्त कर लिया। किन्तु वह  ऐसा नहीं करेगा। वह अपने पिता को जीवन भर की सज़ा नहीं देगा। न ही वह अपने आप को धोखा देगा। वह अपनी चुनी राह पर ही चलेगा। अपने मन में दृढ निश्चय कर वह घर की तरफ चल दिया।

http://www.tumbhi.com/writing/short-stories/meri-raah/ashish-trivedi/40971#.U7Y249FGDCk.gmail

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