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भोर

 

 घर के आँगन में एक नन्ही सी लड़की किलकारियां मार रही थी. ठुमक ठुमक कर पूरे आँगन में घूम रही थी. अचानक ही प्रश्न भरी निगाहों से देखते हुए बोली " ऐसा क्यों कर रही हो ? क्या मैं तुम्हारा अंश नहीं ? मुझे भी तो तुमने अपने रक्त से सींचा है . तो फिर क्यों ? सिर्फ इसलिए की मैं एक लड़की हूँ."
वसुधा की आँख खुल गयी. पसीने से पूरी तरह भीगी हुई थी. कुछ देर तक बिस्तर में बैठी सपने के बारे में सोंचती रही.फिर ताज़ी हवा खाने बालकनी में आ गयी. 
चिड़ियाँ चह चहा रही थीं . आसमान में एक रक्तिम लकीर जल्द ही सवेरा होने की सूचना दे रही थी. किन्तु उसके मन में निर्णय का सूर्य निकल आया था वह अपनी बच्ची को जन्म देगी.

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मुसाफिर

कल रात अचानक ही बंसल साहब का निधन हो गया। मोहल्ले में जब यह समाचार फैला तो लोग उन्हें अंतिम विदाई देने उनके घर पर एकत्र हुए। अर्थी निकलने की तैयारी हो रही थी। मोहल्ले के दो बुज़र्ग खन्ना जी और पांडे जी बाहर बैठे बात कर रहे थे। "अरे यह तो सबके साथ होना है। हम सब तो मुसाफिर हैं। ना जाने कब स्टेशन आ जाए और उतरना पड़े।" पांडे जी ने दार्शनिक अंदाज़ में कहा। "सही कहा पांडे जी। लेकिन तब भी इंसान माया में फंसा रहता है।" "सुना है बंसल किसी केस में फंसा था। पेंशन अटकी हुई थी।" "अजी जुगाड़ू बंदा था। ऊपर तक पहुँच थी। सब क्लियर हो गया।" खन्ना जी ने रहस्य खोला। "क्या लाभ ऐसे पैसे का। मरने पर इकलौता बेटा भी साथ नही है।"  "सही कहा पांडे जी। अब बेचारी मिसेज बंसल अकेली पड़ गईं।" "अब यह तो सबके साथ है। इस उम्र में जीवनसाथी का ही सहारा होता है।" "बिल्कुल सही। भाभी जी कैसी हैं।" "बेटे बहू के लिए हुड़कती रहती हैं।" "तो शेखर के पास क्यों नही चले जाते।" "उनकी अपनी जिंदगी है। दोनों वर्किंग हैं। वहाँ भी दिन...

भूचाल

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दफन

खिड़की पर खड़े हुए सरोज की नज़र बाहर क्यारी पर पड़ी. नया नया अंकुर जो भूमि से फूटा था किसी के पैरों के नीचे मसल गया था. उसकी पीड़ा उसने अपनी कोख में महसूस की. उसकी आंखों से आंसू झरने लगे. "यह क्या तूने फिर खाना नही खाया." उसकी सखी शकीला ने कमरे में घुसते हुए कहा. सरोज ने सूनी आंखों से उसकी ओर देखा. शकीला का मन भर आया. उसके सर पर हाथ फेरते हुए बोली "अभी देह कमज़ोर है. बिना खाए कैसे चलेगा. ये ज़ालिम लोग कहाँ छोड़ेंगे. रात को फिर किसी के साथ बिठा देंगे. सहने के लिए ताकत तो चाहिए." कह कर शकीला चली गई. सरोज थाली लेकर बैठ गई. अपनी सारी भावनाओं को उन लोगों ने दिल में दफन कर लिया था. इसी तरह वह सब यहाँ जिंदा रह पाती थीं.