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गज़ल

हॉल में बैठे सभी अपनी अपनी प्रति लिए पढ़ने में मशगूल थे। दरअसल सभी लोग अपने प्यारे दोस्त शम्स की किताब के प्रकाशित होने के मौके पर इकठ्ठा हुए थे। शम्स की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी रूबी ने उसकी गज़लों की यह किताब छपवाई थी। 
सभी को ज़िंदादिल शम्स की कमी महसूस हो रही थी। तभी रूबी ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा "दोस्तों आज मैं आपको वह गज़ल सुनाऊंगी जो शम्स ने मेरे लिए लिखी थी।"
बिना किसी साज़ के रूबी ने गाना शुरू किया। सभी ध्यान से सुन रहे थे। उसकी आवाज़ से लफ्ज़ सजीव हो उठे थे। ऐसा लग था जैसे शम्स वहीं मौजूद हो।

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ना मे हाँ

सब तरफ चर्चा थी कि गीता पुलिस थाने के सामने धरने पर बैठी थी। उसने अजय के खिलाफ जो शिकायत की थी उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई थी।  पिछले कई महीनों से गीता बहुत परेशान थी। कॉलेज आते जाते अजय उसे तंग करता था। वह उससे प्रेम करने का दावा करता था। गीता उसे समझाती थी कि उसे उसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। वह सिर्फ पढ़ना चाहती है। लेकिन अजय हंस कर कहता कि लड़की की ना में ही उसकी हाँ होती है।  गीता ने बहुत कोशिश की कि बात अजय की समझ में आ जाए कि उसकी ना का मतलब ना ही है। पर अजय नहीं समझा। पुलिस भी कछ नहीं कर रही थी। हार कर गीता यह तख्ती लेकर धरने पर बैठ गई कि 'लड़की की ना का सम्मान करो।'  सभी उसकी तारीफ कर रहे थे।

केंद्र बिंदु

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