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स्कूल

स्कूल
(चित्र प्रतियोगिता के लिए)
अपना काम निपटा कर मंजुला कुछ देर टीवी देखने के इरादे से सोफे पर पसर गई. न्यूज़ चैनल लगाया तो खबर देख कर उसके होश उड़ गए. जिस स्कूल में उसके बच्चे पढ़ते थे उसकी बिल्डिंग को आतंकवादियों ने अपने कब्ज़े में ले लिया था. कुछ क्षणों के लिए वह बदहवास हो गई किंतु जल्दी ही उसने स्वयं को संभाला अपने पति को फोन किया और फिर बच्चों के स्कूल की तरफ चल पड़ी.
स्कूल बिल्डिंग से कुछ दूर पहले ही सारे अभिभावकों को रोक लिया गया था. सभी अपने बच्चों की सलामती की प्रर्थना कर रहे थे. कुछ ही देर में मंजुला के पति भी वहाँ पहुँच गए. सब लोगों के साथ वह दोनों भी अपने बच्चों के बारे में पूंछताछ करने लगे. किंतु कोई कुछ बता नही पा रहा था. अभिभावकों के लिए एक एक पल मुश्किल हो रहा था.
बिल्डिंग के अंदर सेना के कमांडो अातंकवादियों पर काबू पाने का प्रयास कर रहे थे.
बिल्डिंग से आती गोलीबारी की आवाज़ मंजुला और उसके पति को बेचैन कर रही थी. कुछ ना कर सकने की विवशता उनके दिल को चीरे डाले जा रही थी.
लगातार चार घंटों तक चली मुटभेड़ के बाद एक आतंकवादी मारा गया और एक को गिरफ्तार कर लिया गया.
इस हमले में दस बच्चे और एक शिक्षक को अपनी जान गंवानी पड़ी. कुछ बच्चे घायल भी हुए.
बाकी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. मंजुला के बच्चे पूरी तरह सुऱक्षित थे.
मंजुला ने हमले से तबाह बिल्डिंग को देखा और मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की.

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