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दोस्त


कोहरे की चादर ने सब कुछ ढक रखा था. फुटपाथ पर बैठे मंगलू ने खस्ताहाल कंबल से खुद को ढंकने की नाकाम कोशिश की. ठंड जैसे हड्डियों तक घुसी जा रही थी. मंगलू आस भरी निगाहों से सामने की टी स्टॉल को देख रहा था. मालिक स्टॉल को बंद करने की तैयारी कर रहा था. तभी दुकान में काम करने वाला लड़का एक पाव तथा प्लास्टिक के कप में चाय लेकर आया. मंगलू ने दोनों चीज़ों को झपट कर पकड़ लिया.
उसने इधर उधर देख कर पुकारा "मुन्ना". कुछ ही पलों में उसका सुख दुख का साथी उसके सामने खड़ा होकर दुम हिलाने लगा.
"लो खाओ" मंगलू ने पाव का आधा टुकड़ा तोड़ कर उसके सामने डाल दिया. बाकी बचा हिस्सा चाय में डुबोकर खाने लगा.

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