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रात


दूर तक फैली सरहद. अंधेरे में पूरी मुस्तैदी से उसकी निगरानी करता गुरबख़श सिंह. आज दीवाली थी. शाम को ही घरवालों से बात हुई थी. सब उसे याद कर रहे थे. उसकी दस महीने की गुड्डी की यह पहली दीवाली थी.
वह पूरी तरह चौकन्ना था. ज़रा सी चूक दहशतगर्दों को उसके मुल्क में घुसने का मौका दे देगी. यह मुल्क की शांति के लिए घातक होगा. अपने देश को सुरक्षित रखना उसका दायित्व है.
अपनी नाइट विज़न दूरबीन से वह निगरानी रख रहा था. तभी उसे कुछ हरकत दिखाई दी. वह समझ गया कि आतंकवादी हैं. उसने अपनी स्नाइपर गन से दो को ढेर कर दिया. तभी एक गोली आकर उसके सीने में लगी.
उसकी चौकन्नी आंखें बंद होने लगीं. मरने से पहले उसने अपना काम कर दिया था. अब बाकी काम उसके साथी करेंगे.

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