"परेशान मत हो माँ मैं जल्दी ही अपने लिए कोई ठिकाना ढूंढ़ लूंगी." अपनी ससुराल छोड़ कर आई मंजुला ने कहा.
"कैसी बातें करती है. तेरे रहने से मुझे क्या परेशानी होगी." माँ ने समझाते हुए कहा "पर बेटा इतनी सी बात पर कोई घर छोड़ता है क्या."
मंजुला ने आश्चर्य से कहा "ये इतनी सी बात है."
जब से उसकी ससुराल वालों को उसके गर्भवती होने का पता चला था उस पर सोनोग्राफी कराने के लिए दबाव बढ़ रहा था. वह इसका कारण जानती थी. अतः उसने साफ मना कर दिया. ज्यादा जोर पड़ने पर घर छोड़ कर आ गई.
उसकी माँ ने बात बढ़ाई "यह भी तो हो सकता है कि जाँच का नतीजा उनके मन मुताबिक हो."
मंजुला ने अपनी माँ से प्रश्न किया "यदि उनके मन का ना हुआ तो. क्या करूँ. उनके मन के अनुसार काम करुँ."
माँ कुछ नही बोल पाईं.
"मुझे ईश्वर ने जो दिया है मैं मन से उसे स्वीकार कर चुकी हूँ. मुझे कोई जाँच नही करानी है." मंजुला ने अपना अटल फैसला सुना दिया.
"कैसी बातें करती है. तेरे रहने से मुझे क्या परेशानी होगी." माँ ने समझाते हुए कहा "पर बेटा इतनी सी बात पर कोई घर छोड़ता है क्या."
मंजुला ने आश्चर्य से कहा "ये इतनी सी बात है."
जब से उसकी ससुराल वालों को उसके गर्भवती होने का पता चला था उस पर सोनोग्राफी कराने के लिए दबाव बढ़ रहा था. वह इसका कारण जानती थी. अतः उसने साफ मना कर दिया. ज्यादा जोर पड़ने पर घर छोड़ कर आ गई.
उसकी माँ ने बात बढ़ाई "यह भी तो हो सकता है कि जाँच का नतीजा उनके मन मुताबिक हो."
मंजुला ने अपनी माँ से प्रश्न किया "यदि उनके मन का ना हुआ तो. क्या करूँ. उनके मन के अनुसार काम करुँ."
माँ कुछ नही बोल पाईं.
"मुझे ईश्वर ने जो दिया है मैं मन से उसे स्वीकार कर चुकी हूँ. मुझे कोई जाँच नही करानी है." मंजुला ने अपना अटल फैसला सुना दिया.
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें