जमुना जैसे ही कोठरी में घुसी तो सामने जो देखा उसके पांव उसका बोझ नहीं संभाल पाए. वह निढाल होकर फर्श पर बैठ गई. सामने चारपाई पर उसके पति की लाश पड़ी थी. उसके मुंह से झाग निकल रहा था. अपनी मेहनत से अनाज पैदा करने वाला किसान हालातों की तल्ख़ी वह सह नहीं सका.
चुनाव के मौसम में यह बात तेजी से फैल गई.
जमुना के घर के बाहर मीडिया का मजमा लग गया. कई पार्टियों के नेता उसके दुख में साथ खड़े होने का दावा कर रहे थे. सरकार तथा प्रतिपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा था. जमुना के दुख से स्वयं को जोड़ने की एक होड़ सी लगी थी.
इन सब के बीच जमुना अपने आने वाले कठिन जीवन को लेकर चिंतित थी.
चुनाव के मौसम में यह बात तेजी से फैल गई.
जमुना के घर के बाहर मीडिया का मजमा लग गया. कई पार्टियों के नेता उसके दुख में साथ खड़े होने का दावा कर रहे थे. सरकार तथा प्रतिपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा था. जमुना के दुख से स्वयं को जोड़ने की एक होड़ सी लगी थी.
इन सब के बीच जमुना अपने आने वाले कठिन जीवन को लेकर चिंतित थी.
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