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दंश

दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के कारण सुदीप करीब डेढ़ महीने बाद स्कूल आया था. इस बीच उसकी पढ़ाई का बहुत नुकसान हो गया था. स्कूल आने के बाद उसे पता चला कि बीस दिनों के बाद ही फाइनल एग्ज़ाम होने वाले हैं. वह बहुत परेशान था कि कैसे वह छूटा हुआ कोर्स पूरा करेगा. इतने दिनों में वह कुछ भी नहीं पढ़ सका. पहले का पढ़ा भी दोहराना पड़ेगा.
रीसेस के समय उसे उदास देख कर उसका सहपाठी विनय उसके पास आया और उसे पूरी सहायता देने का आश्वासन दिया.
अपने वादे के मुताबिक विनय ने ना सिर्फ छूटे हुए नोट्स पूरे करवाये  बल्कि मुश्किल हिस्सों को समझने में भी सहायता की. विनय का सहयोग मिलने के कारण ही सुदीप परीक्षा में बैठ सका. जिस दिन परीक्षाएं समाप्त हुईं सुदीप ने  विनय को धन्यवाद दिया. विनय ने उसे गले लगाते हुए कहा "एक दूसरे के काम आना ही इंसानियत है."
रिज़ल्ट वाले दिन सबको उम्मीद थी कि हमेशा की तरह विनय ही कक्षा में प्रथम आएगा. किंतु नतीजा सब को चौंकाने वाला था. इस बार सुदीप बाज़ी मार ले गया था.
सब विनय को छोड़ सुदीप को बधाइयां दे रहे थे.
सब से पीछा छुड़ा कर सुदीप विनय के पास आया और बोला "अगर तुम साथ ना देते तो शायद मैं फेल हो जाता." उसने जेब से एक चॉकलेट निकाल कर विनय को दे दी. 
सुदीप अपने शिक्षकों से मिलने चला गया. विनय ने चॉकलेट को अपने जूते से कुचल कर डस्टबिन में फेंक दिया.

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