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भरोसा

लतिका ने गाना समाप्त कर भैरोंमल की तरफ उम्मीद से देखा. उसकी माँ तुलसी ने पूंछा "भइया कैसा लगा."
"बहुत खूब. आवाज़ में कशिश है. यह तो धूम मचा देगी."
"अब सब तुम्हारे भरोसे है भइया. तुम्हारे बहनोई के जाने से तो रोटी के भी लाले हैं." तुलसी ने हाथ जोड़ कर कहा.
"मेरी बड़ी पहचान है फिल्म लाइन में. मेरे साथ भेज दो. जिंदगी बन जाएगी." भैरोंमल ने आश्वासन दिया.
भैरोंमल तुलसी का दूर का भाई था. कई सालों से मुंबई में था. कहता था फिल्मलाइन के लोगों में उसका उठना बैठना था. तंगहाली झेल रही तुलसी को उम्मीद थी कि उसकी बेटी के हुनर के बदले वह उसे फिल्मलाइन में काम दिला देगा. उसने लतिका को भैरोंमल के साथ भेज दिया.
आंखों में सपने संजोए लतिका पूरे भरोसे से उसके साथ आ गई. लेकिन शोहरत की चकाचौंध के बदले उसे जिल्लत के अंधेरे मिले. एक बियर बार में उसका हुनर बेकार हो रहा था.

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