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पतंग

घर का माहौल तनाव पूर्ण था. विपिन और उसकी पत्नी अपने किशोरवय के बेटे के आज के व्यवहार से बहुत दुःखी थे.
समाज में जो कुछ हो रहा था उसे देखते हुए विपिन ने घर में कड़ा अनुशासन बना रखा था. उसके बेटे मयंक को इंटरनेट मोबाइल फोन कुछ भी प्रयोग करने की इजाज़त नहीं थी. वह स्कूल और कोचिंग के अलावा कहीं आता जाता भी नहीं था. विपिन का मानना था कि इस तरह से ही इस नाज़ुक उम्र में वह मयंक को भटकने से रोक सकता है. 
वैसे तो मयंक भी उसकी हर बात मानता था. अपनी पढ़ाई पर उसका पूरा ध्यान था. किंतु कभी कभी विपिन का यह अनुशासन उसे बुरा लगता था. आज उसके सबसे अच्छे दोस्त का जन्मदिन था. एक रेस्त्रां में उसने अपने दोस्तों को दावत दी थी. मयंक ने जाने की इजाज़त मांगी तो विपिन ने मना कर दिया. मयंक को इसका बुरा लगा और जीवन में पहली बार उसने ऊँची आवाज़ में इसका विरोध किया. विपिन उसके इस बर्ताव से दंग रह गया.
विपिन की बहन जो उसके घर आई हुई थी ने समझाते हुए कहा "देखो विपिन इस उम्र के में बच्चों को वैसे ही आसमान में उड़ने देना चाहिए जैसे कि पतंग. अनुशासन की डोर हमारे हाथ में रहे लेकिन ना तो इतनी ढीली हो कि पतंग नियंत्रण से बाहर हो जाए. ना ही इतनी कसी कि वह उड़ ही ना सके."
विपिन को अब अपनी भूल का एहसास हो रहा था.

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