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प्रण


माधवी का केवल दसवीं पास होना अब उसके पति को अखरता था. उसके पिता एक सरकारी विभाग में अधिकारी थे किंतु लड़कियों के लिए उनके खयाल बहुत पुराने थे. अतः उसे केवल दसवीं तक ही पढ़ाया. विवाह के समय उसके पति की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नही थी. यही कारण था कि बड़े घर में रिश्ता होने के कारण तब उन्हें उसका कम पढ़ा होना बुरा नही लगा था.
अब स्थिति बदल चुकी थी. अपनी मेहनत के दम पर वह समाज में अपना एक स्थान बना चुके थे. अब बड़े लोगों में उनका उठना बैठना था. इसलिए उन्हें पत्नी का कम पढ़ा लिखा होना खलता था. परंतु जब उसका बेटा भी अपने दोस्तों के सामने उससे कतराने लगा तब उसके लिए यह बहुत कष्टदायक हो गया.
पहले तो वह इस बात के लिए अकेले में रोती थी किंतु शीघ्र ही उसे एहसास हो गया कि इससे कोई फायदा नही है. यदि इस स्थिति को बदलना है तो उसे स्वयं को शिक्षित करना होगा.
उसने प्रण किया कि वह कम पढ़े होने के दाग को मिटा कर रहेगी. बारहवीं के लिए उसने ओपन स्कूल से फार्म भर दिया.

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