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अपना


मंजू देवी को डॉक्टर ने बताया कि उनके किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डोनर मिल गया है. 
मंजू देवी ने अपने बच्चों की तरफ देखा. उन्होंने अपनी नजरें झुका लीं. फिर उन्होंने पति की तरफ देखा. उनके पति ने सामने की तरफ उंगली उठा दी.
सामने गणेश खड़ा था. वह अनाथ लड़का जिसकी शिक्षा का भार उनके पति ने अपने ऊपर लिया था.
मंजू देवी के कानों में अपने शब्द गूंजने लगे 'आप भले ही इस पर कितना खर्च कर लें. आड़े वक्त में अपने बच्चे ही काम आएंगे.'
उनकी आंखों से पश्चाताप के अश्रु छलक पड़े.

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