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ठहराव


सुहास एक आगर्षक युवक था. कई लड़कियां उसकी खूबसूरती की तरफ आकर्षित रहती थीं. यही कारण था कि उसकी कई सारी गर्लफ्रैंड थीं. वह एक दिल फेंक आशिक के रूप में मशहूर था. 
उसके घर वाले तथा हितैषी मित्र अक्सर ही उसे समझाते थे कि अब समय आ गया है कि वह इधर उधर भटकना छोड़ कर किसी अच्छी लड़की के साथ शादी कर ले. परंतु सुहास को अपनी दिल फेंक आशिक की छवी बहुत अच्छी लगती थी. वह इसके साथ बहुत खुश था. उसके सभी मित्रों ने विवाह कर घर बसा लिया था.
जीवन सदैव एक जैसा नही रहता. भटकते हुए इंसान को भी ठहराव की ज़रूरत पड़ती है. सुहास के जीवन में भी वह वक्त आया. उसके माता पिता की दुर्घटना में मृत्यु हो जाने से वह बहुत एकाकी महसूस करने लगा था. उसे एक ऐसे हमसफर की चाह होने लगी थी जिसके साथ वह सुख दुख  बांट सके. किंतु अब तक भंवरे की तरह एक फूल से दूसरे फूल पर मंडराने वाले सुहास के जीवन में ऐसा कोई नही था. अब उसे अपने हितैषियों की बात सही लग रही थी.

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