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हरफनमौला

विपिन की एक आदत उसके जानने वालों को अच्छी नहीं लगती थी. वह यह जतलाने की कोशिश करता था कि दुनिया का हर काम वह आसानी से कर सकता है. जब भी कोई किसी के हुनर की तारीफ करता तो वह बीच में ही बोल पड़ता "यह कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है. आराम से किया जा सकता है." उसकी यह आदत उसकी साली को सख़्त नापसंद थी. 
एक बार विपिन अपनी ससुराल में था. सभी बातचीत कर रहे थे. तभी उसके छोटे साले ने आकर कहा "अचानक कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर में कोई खराबी आ गई है. मुझे एक जरूरी प्रोजक्ट बनाना है."
उसकी साली ने कहा "अगर प्रकाश भाईसाहब होते तो कंप्यूटर ठीक कर देते."
उसकी बात सुनते ही विपिन बोल उठा "अरे इसमें कौन सी बड़ी बात है."
यह सुनते ही उसकी साली खीझ कर बोली "तो जीजाजी आप ही ठीक कर दीजिए."
यह सुनते ही विपिन खिसिया गया "वो मेरा सर दर्द कर रहा है. वरना यह काम बहुत मुश्किल नहीं है."

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ना मे हाँ

सब तरफ चर्चा थी कि गीता पुलिस थाने के सामने धरने पर बैठी थी। उसने अजय के खिलाफ जो शिकायत की थी उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई थी।  पिछले कई महीनों से गीता बहुत परेशान थी। कॉलेज आते जाते अजय उसे तंग करता था। वह उससे प्रेम करने का दावा करता था। गीता उसे समझाती थी कि उसे उसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। वह सिर्फ पढ़ना चाहती है। लेकिन अजय हंस कर कहता कि लड़की की ना में ही उसकी हाँ होती है।  गीता ने बहुत कोशिश की कि बात अजय की समझ में आ जाए कि उसकी ना का मतलब ना ही है। पर अजय नहीं समझा। पुलिस भी कछ नहीं कर रही थी। हार कर गीता यह तख्ती लेकर धरने पर बैठ गई कि 'लड़की की ना का सम्मान करो।'  सभी उसकी तारीफ कर रहे थे।

केंद्र बिंदु

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