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जीत


रोहित कक्षा छह का छात्र था. एक बार उसकी हिंदी की अध्यापिका ने कक्षा के सभी विद्यार्थियों को 'पर्यावरण की सुरक्षा' विषय पर लेख लिख कर लाने को कहा. उन्होंने बताया कि जो लेख सबसे अच्छा होगा वह स्कूल की मैगज़ीन में छपेगा. रोहित अपने सहपाठियों पर रौब झाड़ना चाहता था. अतः उसने इंटरनेट इस विषय पर मौजूद हिंदी लेख में से एक को कॉपी कर पेस्ट कर लिया. फिर उसका प्रिंट निकाल कर उसे अपनी नोटबुक में नकल करने लगा. उसके पापा को जब यह पता चला तो उन्होंने उसे पास बिठाकर समझाया "यह गलत है. गलत तरीके से मिली सफलता कभी आत्मविश्वास नही देती. जबकी अपनी मेहनत से तुम जैसा भी करोगे वह तुम्हारे आत्मविश्वास को बढ़ाएगा." उन्होंने स्वयं इंटरनेट पर पर्यावरण पर मौजूद सारी जानकारी उसे दिखाई और अपने भी कुछ अनुभव बताए. उसके बाद रोहित को उन जानकारियों के आधार पर स्वयं लेख लिखने को कहा. अपने पिता की बात मान कर रोहित ने वैसा ही किया. लेख पूरा होने पर उसके मन में अपनी क्षमता के प्रति विश्वास उत्पन्न हुआ. कुछ दिनों बाद जब अध्यापिका ने बताया कि उसका लेख सबसे अच्छा था व मैगज़ीन के लिए चुना गया है तो वह खुशी से उछल पड़ा.

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