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इंटरव्यू

लॉज में चेकइन करते ही अजय इंटरव्यू में जाने के लिए तैयार होने लगा. निकलने से पहले उसने अपने सर्टिफिकेट्स की फाइल निकालने के लिए बैग खोला. इधर उधर देखा किंतु फाइल नही थी. सारा सामान निकाल दिया फिर भी नही मिली. वह सर पकड़ कर बैठ गया. लगता है कल रात ट्रेन में चादर निकालते समय बाहर निकाली होगी फिर रखना भूल गया. वह मन ही मन बड़बडाया. यह सब उस आदमी की वजह से हुआ था. उसकी बकबक से दिमाग परेशान हो गया था. कितना ढीट था बातों बातों में उसने पता कर लिया कि वह किस कंपनी में किस जगह इंटरव्यू के लिए जाने वाला है. वह इसी शहर का निवासी था. 
अब क्या करे वह समझ नही पा रहा था. बिना इंटरव्यू दिए लौट जाए तो सब हंसेंगे. इतनी बार नकारे जाने के बाद अब यही एक उम्मीद बची थी. इंटरव्यू के लिए जाएगा तो उन्हें क्या स्पष्टीकरण देगा. बहुत सोंचकर उसने इंटरव्यू के लिए जाना तय किया.
एक एक कर कैंडीडेट्स अंदर जा रहे थे. अभी अभी एक युवती भीतर गई थी. अब उसकी बारी थी. वह सोंचने लगा कि किस प्रकार अपनी बात रखेगा. तभी चपरासी ने बताया कि रिसेप्शन पर कोई उससे मिलने आया है. वह जब रिसेप्शन पर पहुँचा तो देखा कि वही व्यक्ति था जो ट्रेन में मिला था. वह कुछ कहता उससे पहले ही उसने बैग से फाइल निकाल कर उसे थमा दिया. फाइल देखते ही अजय खुशी से उछल पड़ा. यह उसके सर्टिफिकेट्स थे. वह उसका शुक्रिया अदा करता तब तक उसके नाम की पुकार हुई. 
"आप जाकर इटरव्यू दीजिए. आल दि बेस्ट." कह कर वह व्यक्ति चला गया. 
शुक्रिया अजय के मुह में ही रह गया. मन ही मन उसे धन्यवाद देते हुए वह इंटरव्यू देने चला गया.

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