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बाहरी रूप


मोनिका की स्कूटी अचानक ही यहाँ आकर खराब हो गई. उसने चारों तरफ नजंर दौड़ाई. यह इलाका बहुत सुनसान था. वह इस इलाके में पहली बार आई थी. सूरज डूब चुका था. कुछ ही देर में अंधेरा होने वाला था. वह डर गई. उसने अपने पापा को बुलाने के लिए अपना फोन निकाला. फोन की चार्जिंग भी खत्म हो गई थी. वह खुद पर झल्लाई. ऐसी गल्ती कैसे हुई उससे. चलते समय उसने मोबाइल भी नही देखा. अब क्या करे. किससे मदद मांगे. वह यही सब सोंच रही थी कि तभी एक आदमी आता दिखाई दिया. उलझे बाल, चेहरे पर खिचड़ी दाढ़ी, अस्त व्यस्त मैले से कपड़े. उसका हुलिया देख कर मोनिका को वह सही आदमी नही लगा. वह आदमी उसकी तरफ ही बढ़ रहा था. मोनिका घबरा गई. उसके पास आकर वह आदमी बोला "कोई समस्या है क्या."
उसे पास देख कर मोनिका रूखे स्वर में बोली "कुछ नही है. आप दूर हटिए."'
उसे परेशान देख वह आदमी थोड़ी दूर पर जाकर खड़ा हो गया. मोनिका कुछ समझ नही पा रही थी कि अब क्या करे.
दूर से ही वह आदमी बोला "देखो कोई दिक्कत हो तो बता दो. घबराओ नही. तुम्हें यहाँ अकेले खड़े देखा तो पूंछ लिया."
उसकी बात से मोनिका कुछ शांत हुई. उसने सोंचा कि किसी से तो मदद मांगनी ही है. वह बोली "मेरी स्कूटी खराब हो गई है और मेरे मोबाइल की बैटरी भी खत्म हो गई है."
उस आदमी ने अपनी जेब से एक पुराना मोबाइल निकाला और मोनिका की तरफ बढ़ा कर कहा "इससे फोन कर मदद मांग लों"
कुछ संकोच के साथ मोनिका ने फोन लेकर अपने पापा को बुला लिया.
वह आदमी बोला "जब तक कोई नही आता मैं यहीं बैठा हूँ." यह कह कर वह फुटपाथ पर बैठ गया.
मोनिका भी अपने पापा का इंतज़ार करने लगी. मन ही मन वह उस आदमी के प्रति अपने व्यवहार पर लज्जित थी.
कुछ देर में उसके पापा आ गए. वह भाग कर उनसे लिपट गई. उस आदमी का शुक्रिया अदा करने के लिए जब उसने पीछे मुड़ कर देखा तो वह जा चुका था.

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